Friday, December 9, 2016

मुझे हर लडाई से नही परहेज मेरी माॅ चलती काॅटो पर नही फूलो की सेज

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यह बाल श्रम नही है ये मेरा अपनी माॅ के प्रति धर्म है
देख रहा हूॅ कब से उठा रही बोझा मै खडा देखता रहू नही मेरे ऐसे संस्कार ये है धर्म विरूध विचार
इसलिये यह कदम बढाया है मैने भी अपनी शक्ति अनुसार बोझा उठाया है
मुझ है उसके दर्द का अहसास उसको देखो लग रही है प्यासकोई करे न उसका उपहास
इसलिये हाथ बटाता हू बोझ उठाता हू
इसके लिये मुझे हर लडाई से नही परहेज मेरी माॅ चलती काॅटो पर नही फूलो की सेज

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