शिव की जटाओ से बह निकली अमृत धार गरल का करते पान और अमृत को देते प्रवाह विस्तार
वे दुनिया के पिता और गुरू महान करते कंकर से शंकर का निर्माण
उनकी पूजा होती चहूॅ ओर अलग अलग नाम से पुकारते पहुॅच न सके कोई छोर
जानने से ज्यादा जरूरी मानो उनके बताए मार्ग को पहचानो
जड चेतन मे मेरा वास मै ही हर जीव मे लेता स्वांस
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