
प्रकृति मे कहाॅ आपस का विरोध है न है धर्म की लडाई ,इनने क्यो नही इस तरह की फिरत है पाई
ये भी हमारी तरह ही पैदा हुए इनमे भी है जान ,ये क्यो नही किसी को मार मार बनाते मुसलमान
इनके लिये कौन काफिर जरा बताओ, अगर हो तो चलो उनका घर जलाओ
हम भी तो उसी तरह प्रकृति की संतान, पर हमारे काम इतने गंदे, फिर भी हम इंसान
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