
जरूरी है क्या बसाना ऐसे नगर ,जरूरी है कि रहे आसमान पर
कंकड पत्थर जोड कर बसाया आसमान पर घर, नीचे देखो तो लगता डर
देखे तो लगता इमारते ही करती आपस मे बात ,वे हो गई बडी और हमारी हो गई छोटी औकात
दडबो से झाकती जिन्दगी परेशान, ये नगर नही जिन्दा लोगो का है कब्रिस्तान
इन पत्थर के बुतो को देखती आखे और इनकी ही सुनते कान, पत्थरो के बीच खो गया इंसान
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