संशय का तू हुआ शिकार ,भावनाओ मे बह कर रहा विचार
जो भी सामने खडे भले ही तुम्हारे प्यारे, पर अधर्म बढ रहा इनके सहारे
माना भीष्म द्रोण और बहुत से अच्छे इंसान, पर अधर्म केसाथ खडे होकर गिरा रहे अपना मान
उठा अथियार मत कर विचार ,जिन्हे तू देख रहा सामने उन्हे मै पहले चुका मार
बस तू ले यश का लाभ क्योकि इस पर तेरा अधिकार, मत कर ज्यादा सोच विचार
आज तू नही अगर हथियार उठाएगा ,तो कायर कहलायेगा ,अपना मान गवाएगा और धर्म की होगी हार
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