यह है विचार प्रवाह उगता सूर्य इसका गवाह
लेकर चलते रास्ते की गंदगी साथ कहते आस पास घटती बात
किसी की नजर गंदगी पर रहती जो इसमे बहती पर कोई इसमे नहाता सूर्य अर्घ चढाता
जिसकी जैसी श्रद्धा उसको वैसा मिलता है प्रवाह तो बस चलता है
मेरे से प्रेम करने वालो आप इसमे नहाओ अपना मन चाहा उठाओ
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