लोगो को लगता किया किस प्रकार पर ये तो है पानी की दरकार
मीलो चलकर जाना और पानी लाना उसी का ये परिणाम करने पडते इस तरह के इंतजाम
खटिया पर बैठ नहाते है, उस पानी को भी उपयोग मे लाते है
जिनके पास पानी वे क्या जाने मोल, हम तो पानी उपयोग मे लाते तोल
जगह जगह पानी बचाने के करते उपाय, की किसी तरह आसमान का अमृत रोक पाए
कितना पानी हो जाता खराब, बह के निकल जाता समुद्र मे नही कोई हिसाब
चलो करते है दो काम एक प्यासे को पानी पिलाते है, दूसरा पानी बढाने की रचना बनाते है
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