जुल्फे घटा गंभीर हो गई सुरत बदली का चाॅद यह सहज सुन्दरता का एहसास
हर नजर बैचेन कर रही बार देखने का प्रयास
कब पूरा देख पाउगा इस पर बीत रहे पल आज रात बीत गई कोई बात नही जरूर देखूगा कल
जिसने देखाउसकी नजर ही खो गई उसके लिये हर चीज चाॅद हो गई
यह सब है छाई घटा का खेल जो चाॅद को छूकर कर रही तरह तरह के खेल
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