
कल तक जो टहनियो पर गर्व से मुसकुराते थे आज गल गये मिट्टी मे मिल गये
आज जो है उपर शाखो पर लोगो की आॅखे पर कल उनका भी यही हाल समय ही उत्तर और सवाल है
इसलिये विनम्र बन झुके रहो जब तक समय रोके रूके रहो लोगो की आॅखो अभिमान से न चुभो
हर समय रहो सम तो गिरने का नही होगा गम
यह हर समये गिरने वाला पत्ता है बताता की सबके गिरने का समय है आता
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