दूसरो की ओर ज्यादा देखने होता है यह हाल हम नही हल कर पाते अपने चंद सवाल
इनके बारे मे मेरा यही विचार है कुछ साल बंद मुॅह कर ये अपने आपको निहारे कमी दूर करने का विचारे
नही तो बिना प्रयास ही अपनी करनी से लोगो को हॅसाते और फिर असहज हो जाते है
बडे बूढे अगर दबाव मे सर झुकाते है पर पीठ पीछे तो हॅसते और मुस्कुराते है
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