
कई बार जीवन मे हमे हो जाता अपने आप से प्यार नही थकते अपने आपको निहार
पर सावन की तरह होता हमारा हाल जीवन मे यह समय रहता चंद साल
मौसम की बहार तो हर साल आती है पर यह बहार तो एक बार द्वार खटखटाती है
उसके बाद चेहरे की सिकुडन मे निहारते है पुराना अक्स पर पा न सका कोई शख्श
No comments:
Post a Comment