Wednesday, December 7, 2016

बचपन की अलग ही है बात तब तो सूरज को भी छू सकते थे हाथ

बचपन की अलग ही है बात तब तो सूरज को भी छू सकते थे हाथ
तब तो चाॅद की करते थे सवारी चरखे वाली बुढिया की बाते प्यारी
तारो के बगीचे का खेल चंदा मामा से वह अपना मेल
सब आज सपना हो गया हकीकत के कठोर व्यवहार से खो गया Photo

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