हर ओर अंधकार गहरा नही दिखाई देता अपना हाथए तो कौन निबाहे ऐसे मे साथ
कहते साया भी प्रकाश के कारण, कोई नही जो साथ चले अकारण
जिसकी हर वजह खो गई हो जिन्दगी ऐसी बेवजह हो गई हो
उसे सुनाई देता एक नाद एकांत भी रहता जिससे आबाद
कहते है वही मूल नाद है उसमे डूब जाओ अह्लाद है
वही मंजिल पर उसमे ही है जाना ,मन को करो किनारे बंद करो बेवजह आना जाना
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