ठंड के मारे मुॅह की हवा बादल बन रही पानी की कुल्फी जम रही
ठंड के मारे मुॅह की हवा बादल बन रही पानी की कुल्फी जम रही पंखो की चादर ओढने के सिवाय क्या चारा धुन्ध मे खोया जहाॅ सारा इस पेड का मुझसे भी बुरा हाल सारे पत्ते छोड गये साथ है बेहाल हमारे पास औढने को है आकाश बचाव तो है पंख और प्रकाश
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