Sunday, July 2, 2017

#intolerance in India # kashmir #pandit #BJP #Modi #development #India #

लोगो को भी यह लुभाती है मुझे एक भ्रम छलावा बनाती है

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जुल्फ की तरह उलझनो ने भी है घेरा चाहती हूॅ सुलझ जाए पर सुलझती नही हो जाता सबेरा। लोगो लगता ये मेरी सुन्दरता को बढाती पर मै जानती हूॅ सुलझाने मे कितनी उलझ जाती। इसे मे जीवन गुजर रहा है कुछ सुलझती तो लगता सवॅर रहा है। शायद इस खेल मे मेरा हो रहा विकास अब घबराहट नही होती करने मे प्रयास। मै जनती हूॅ इन्हे पूरा सुलझना नही है कभी तो क्यो करू फिकर की चल रहा है जीवन भी अभी। सब सुलझना तो मौत है या है जीवन से सन्यास इस लिये मैने शिथिल कर दिये है प्रयास। अभी उलझनो का आनंद है रोज घन घटा समान घेरती है कुछ करने को प्रेरित करती पेरती है। लोगो को भी यह लुभाती है मुझे एक भ्रम छलावा बनाती है।

Saturday, July 1, 2017

मोदी जी ने पूछा सीए नोटबंदी की रात जाग कर रहे थे काम वे कौन सी सर्जिकल स्ट्राइक को दे रहे थे अंजाम


आज के समाचार है इस प्रकार मोदी जी ने पूछा सीए नोटबंदी की रात जाग कर रहे थे काम वे कौन सी सर्जिकल स्ट्राइक को दे रहे थे अंजाम क्या वे भी देश के लिये लहू बहा रहे थे या चोरी का माल ठिकाने लगा रहे थे।
राहुल लौटे सुन्दर सी नानी के पास से कांग्रसियो के चेहरे खिल उठे इस सुखद एहसास से भगवान सबको नानी दे इतनी सुन्दर जो प्रेम उमड पडे आपके अंदर।
आतंकी हमले की बरसी पर खुला ढाका कैफे आज सोचे समझे बंगलादेशी समाज धर्माधंके लिये आतंकी गतिविधी है रिवाज आपके यहाॅ भी सुनाई देने लगी है यह भद्दी आवाज।
छै करोड पौधे रोपे जाएगे नर्मदा किनारे नर्मदा मे बहती धार इनके ही सहारे अगर ये होगे फलदार तो बन जाएगे गरीबो के जीवन सहारे आज की आबादी आने वाली पीढी के लिये विचारे।
एक लाख फर्जी कम्पनियो का हो गया स्वर्गवास मोदी जी आप पर पूरा देश करता है विश्वास कम अक्लो का  तो आज उड रहा हर और परिहास।
राष्ट्रपति चुनाव मे मीरा कुमार नही बलि का बकरा बकरीद का समय नही आया मीरा कुमार से यह शब्द किसने कहलवाया।
डाक्टर मारपीट को लेकर रहते है तनाव मे शिक्षक और डाक्टर को सम्मान देना भूल गये हम बहाव मे वे दिन रात करते है काम उनके हाथ कर्म नही परिणाम पर उन्हे भी कसके थामनी होगी मानवता की लगाम।
 

#China the real devil#

July 1, 2017

आनंद के समय का यह साथ है सब नाच गा रहे है हम जीवन क्लेश मिटा रहे है।

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बारिश मौसम वाली हाथ मे चाय की प्याली लगता यूही चलती रहे और खत्म न हो हाथ की प्याली। सच यू खिडकी से देखना गिरती बूॅदो कितना अच्छा लगता है जीवन आनंद है यह कथन सच्चा लगता है। इन बूॅदो मे से कुछ जब बूॅदे चेहरे पर आती है सिहरन सी दौड जाती है। हर आदमी प्यासा है हर के जीवन मे हताशा और निराशा है।जैसे इन बूॅदो के पडने से पौधे मे आ जाती है जान तो हममे भी उन पेड पौधो की तरह है प्राण। जल का गिरना किसको नही भाता क्योकि जल का जीवन से है नाता। लगता यू ही जीवन धार बहती रहे कोई कुछ न कहे वह जीवन संगीत कहती रहे।  उसके गिरने से प्रकृति मे उल्लास स्वर बता रहा जो आस पास है। जम के जब बरस रहा हो जल तो लगता चलो भीग ले कुछ पल और साथ हो कोई अपना तो क्या बात है आनंद के समय का यह साथ है सब नाच गा रहे है हम जीवन क्लेश मिटा रहे है।

पेड लगाने का मिलता ही है फल आज नही तो कल दिखा रहा पेड पर लगा कटहल

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पेड लगाने का मिलता ही है फल आज नही तो कल दिखा रहा पेड पर लगा कटहल। यह समय आया है आज निकल जाएगा कल। इस समय करने है दो काम जिनका होता व्यापक परिणाम। आसमान से बरस रहा अमृत रूप जल जिसको सहेजा आज तो बनेगा सुनहरा कल। दूसरे लगाने है पेड छोडना नही कोई खाली जगह या खेत की मेड। फल और सब्जी मिलती है आराम से एक इस जतन और काम से। बानओ पानी की रचना छोटी छोटी अपने आस पास इससे गर्मी मे बुझती है हमारी प्यास। इसके कारण हमारे कुॅओ मे बना रहता जल यही समय है पानी बचाने का यही पल। पानी और पेड का अनोखा है साथजैसे सूरज उगने से मिटता अधियारा खत्म होती रात। इस समय के प्रयास इनका असर है खास समय निकलने पर लगाए पेड सूख जाएगे मेहनत के परिणाम नही आएगे ।