
बारिश मौसम वाली हाथ मे चाय की प्याली लगता यूही चलती रहे और खत्म न हो हाथ की प्याली। सच यू खिडकी से देखना गिरती बूॅदो कितना अच्छा लगता है जीवन आनंद है यह कथन सच्चा लगता है। इन बूॅदो मे से कुछ जब बूॅदे चेहरे पर आती है सिहरन सी दौड जाती है। हर आदमी प्यासा है हर के जीवन मे हताशा और निराशा है।जैसे इन बूॅदो के पडने से पौधे मे आ जाती है जान तो हममे भी उन पेड पौधो की तरह है प्राण। जल का गिरना किसको नही भाता क्योकि जल का जीवन से है नाता। लगता यू ही जीवन धार बहती रहे कोई कुछ न कहे वह जीवन संगीत कहती रहे। उसके गिरने से प्रकृति मे उल्लास स्वर बता रहा जो आस पास है। जम के जब बरस रहा हो जल तो लगता चलो भीग ले कुछ पल और साथ हो कोई अपना तो क्या बात है आनंद के समय का यह साथ है सब नाच गा रहे है हम जीवन क्लेश मिटा रहे है।
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