हजारो साल के तप पर भारी पड रही 1200 साल की गुलामी संस्कार बह गये आई वहशी सुनामी
इसमे से निकलना नही आसान इतनी बडी आबादी अपने मुल्यो और संस्कार से अनजान
औरतो बहनो को घुमना चाहिये रात बिरात पर उसके लिये हमे बदलने होगे हालात
अभी हम अपने काम मे लगे है आजू बाजू कटीले झाड है बडे इनसे हो जाएगे लहू लुहान क्योकि खतरो से हम है अनजान
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