दुनिया अशांत इसलिये की वहाॅ है किसी न किसी तरह का वियोग इसे दूर कर सकता केवल योग
किसी को अपनी सत्ता की पिपासा नही मिलने पर कुण्ठा और हताशा
इसी हताशा निराशा से जन्म लेता उन्माद यही है जो फैलाते दंगा और फसाद
इस लिये चलो करे योग और ध्यान चलो उस सर्व शक्तिमान का करे गुणगान
एक बार उसके साथ हो गया अगर संयोग तो फिर कैसी हवस और कैसा अशांती का रोग
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