प्रकुति और मनुष्य का यही नाता है एक दूसरे का साथ एक दूसरे को बढाता है
देखो तो फूल कौ चढ हमारे सर मुस्कुरा रहे जैसे बच्ची और फूल दोनो मिल कोई गीत हो गा रहे
संदेश साफ है प्रकृति विरूद्ध नही कुछ माफ है जो प्रकृति के खिलाफ वो हमारे खिलाफ है
देवता भी मुस्कुराते है जब हम साथ मिल उनकी इबादत मे गीत गुनगुनाते है
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