Friday, January 6, 2017

अब भी न कर पाए शुरूवात तो हो जाएगी रात फिर क्या बचेगा एक मुठ्ठी राख जीवन हो गया खाक

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दिन निकलने को है नही कर पाएसफर की शुरूवात बचे चंद पल कुछ ही समय मे हो जाएगी रात
कुछ समय था बचपना नासमी की उमर जवान हुए तो हो गया आशिकी का असर
अब ढलान है समय मघ्यान है इसके बाद तो ढलान है हो चुका जो होना नुकसान है
अब भी न कर पाए शुरूवात तो हो जाएगी रात फिर क्या बचेगा एक मुठ्ठी राख जीवन हो गया खाक

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