हम किसान अपनी जमीन को माॅ मानते है और उसकी गोद मे बैठ खाना मेरे उपर रश्क करता जमाना
किसी को आता होगा टेबल कुर्सी पर खाने का मजा बच्चे के लिये माॅ की गोद से अलग होना है सजा
उसका दुलार उसका प्यार देती हर समय कुछ न कुछ मीठा उपहार और शहरी भी कहाॅ करते इनकार
उनको लगता है वे उॅचे उठ गये है मेरी नजर मे हो गये है माॅ से दूर बेचारे मजबूर
हम देखो उसका भरपूर प्यार पाते है खेत मे बोते और ताजे फल तोडकर खाते है
शहरी के अंदर आलस है समाया नाक की मंक्खी उडाने के लिये नौकर लगाया शरीर बेकार नही सह सकता मौसम की मार
कई इतने बडे हो गये की अपने उपर मूतते कुत्ते को भगाने के लिये नौकर बुलाते है हम मेहनत करते औरफल पाते है
दवाई खाकर जीने से बचना है तो उतर आओ माॅ की गोद मे फिर से बहुत मानसिक बीमारी भी उतर जाएगी सिर से
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