चाहता हूॅ आज जी भर करू तुम्हारा दीदार पूरी डलिया खाली कर दू पहनाउ तुमको ही सारे हार
देखो नही बने तुम्हारे लायक हे सुखदायक पर अरज करो स्वीकार ले लो यह हार
तुम भवो के भूखे मै आभाव का सूखा और कैसे करू श्रृंगार देने को बस है ये फूलो के हार
हे श्याम तुम सबके स्वामी हे अंर्तयामी मेरी अरज करो स्वीकार तुम्हारे लिये सजाया यह बंदनवार
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