Sunday, December 11, 2016

तुम रहोगी दादी हरदम मेरे साथ ,बस अब याद ही याद

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फिर याद आ गई मेरी दादी मुझको आज, कितना बदल गया सब काज
पहले की वह रोज चुल्हे की गोबर से लिपाई, तब जाके कढाई चढाई
आज भी उनके हाथ पकाए खाने की खुशबू याद, इतने साल बाद
वह मिट्टी केबर्तन के अंदर गरम किसे दूध की मलाई, नही खाई आज तक इतनी स्वादिष्ट मिठाई
मलाई के साथ हरे धान का चूरा ,कितना भी खाओ पेट भर जाता मन रहता अधूरा
सिकी रोटी चूल्हे की और दाल ,परवल की सब्जी बेमिसाल
दादी तुम चली गई भगवान के घर,  चाहता तुम जीयो हमेशा तुम्हे लग जाए मेरी उमर
बचपन मे मै सोचता था और कहता था, तुम रहोगी दादी हरदम मेरे साथ ,बस अब याद ही याद

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