Saturday, December 3, 2016

कतार करो छोटी जनता इनसे ना उम्मीद होती


अभी इतनी बची है ये भी नही स्वीकार ,कम करनी पडेगी संसद न चलने देने वालो की कतार
देख लो इनको ध्यान से ,ये रोज खेलते संसद के सम्मान से ,मचाते है हल्ला बार बार कम करनी पडेगी यह कतार
यहाॅ बैठ साधते अपना हित ,ऐसा नही तो करते बात ये तो करते हल्ले गुल्ले से शुरूवात, बाहर का काम करते अंदर हल्ले गुल्ले के सिकंदर
गाॅधी जी परेशान रोज रोज इनके गाने से, कान फाडू तराने से, कहते कहाॅ से ढूढ लाए जमाने से
संसद होती बहस करने को ये देते बाहर धरना, गरीब के सरोकार से इन्हे क्या करना
जनता का पैसा इन पर होता खर्च ,हल्ला करने का बढता जाता मर्ज ,इस लिये कहता हू कतार करो छोटी जनता इनसे ना उम्मीद होती

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