सर पर मक्के की रोट और साग, गाय का बछडा साथ उसे भी मेरे उनसे अनुराग ,जो करते खेत पर काम वे है मेरे सुहाग
वे खेत पर चला रहे हल, उनकी चिंता मे बीतता पल- पल ,वे मेरे प्रियतम प्यारे, उठाते नखरे हमारे
खेत पर रोटी लेकर जाना, अपने सामने उन्हे खिलाना, इसके लिये सबरे से करती जल्दी जल्दी हर काम, लेकर अपने स्वामी का नाम
पर जिन्होने देखा नही खेत, वे क्या जानेगी यह खेत पर का प्यार, हाथ मुॅह धुलाने मे उनके हाथ के पानी के छीटो की मार
इसके लिये रोज बनाती है पति के मन का खाना, फिर कर श्रृंगार खेत पर जाना, यही होती उनसे मन की बात सुनिती है चिडिया वे भी देती साथ
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