आसमान मे घर बादलो मे डेरा, ऐसा सपनो से सुन्दर हो घर मेरा
सूरज भी नही लाल होता सफेद, रौशनी इतनी पर नही तनिक स्वेद
चाॅद लेकर निकलता बर्फकी चादर ,ढक देता अंदर बाहर
इतना नीचा की छूलो हाथ से ,बाते करो किसने रोका है बात से
रात छत सजी तारो के संग, हर तारा चमकता अलग ही रंग
बगैर बिजली नही रह सकते इस घर, जमा देती चाॅद तारो की नजर
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