चारो तरफ से घिरा यह पेड आज अकेला हो गया ,न जाने आस पास का वह जंगल कहाॅ खो गया
बचपन मे मै जब आता था यहाॅ तो बडा सुन्दर नजारा था ,पेडो पे चढना मस्ती करना यही खेल हमारा था
सब पेड काट कर ले लिये आदमी ने अपने काम ,बारिश नही होती कह भगवान को करते बदनाम
बादल तो आते है पर बरसते नही यहाॅ, पता बताने वाले पेड है कहाॅ
हरा-भरा पहाड आज वीरान, आदमी की हवस से सब परेशान
No comments:
Post a Comment