Thursday, December 1, 2016

मुझे भटकना पसंद पर दूसरे न भटके यह है मेरा गुनाह, मै गुमराह

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हो अगर कदमो के निशान ,तो चलना हो जाता आसान
गया था कोई जिसने पाई मंजिल ,फिर भटकने की जगह इन कदमो पर चल कर लो हासिल
जो भटकते है वे नई राह बनाते है, कुछ गुमराह हो जाते है
निशान जिन्हे मंजिल मिली उनने बनाए है, इस लिये बहुतो इन राहो पर कदम बढाए है
बहुत ऐसे भी है जो निशान मिटा कर चलते है ,कि मुझे भटकना पसंद पर दूसरे न भटके यह है मेरा गुनाह, मै गुमराह

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