
विकास का रास्ता तैयार पर आज भी इन्हे मदद की दरकार है। किसान का माल तो खरीद लेती सरकार इनके माल को बिकने की दुकान नही आज भी ग्राहक का इंतजार।अगर इन ग्राम ग्राम मे बैठे इन हुनर मंदो का माल बिकने का इंतजाम हो जाए तो एक बडा काम हो जाए इन्हे भी समर्थन मूल्य नही समर्थन की दरकार है सरकार इनके द्वार आपका इंतजार है। बहुत छोटी लागत बहुत छोटा सा कारोबार है इने काम के लिये सहारे की दरकार है। इनके हाथो मे है हुनर बेमिसाल पर नही खरीदार बिक नही रहा माल इसलिये हालबदहाल। एक किसान एक ये हुनरमंद करिये सरकार इनका प्रबंध इन्हे भी विकास की चाह हुनरमंद होना ही बन गया इनका गुनाह। बाजार इनके घर से है बहुत दूर ये बेचारे कमजोर और मजबूर।
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