
इतनी विशाल धरती और हमारा कितना छोटा आकार पर हमारे घमंड के आगे छोटा पड जाता संसार
जब तक हम प्रकृति के थे आराधक तब तक सब था अनुकूल भूलकर भी नही होती थी हमसे भूल
आज हम ने अपने को इसका मालिक बना लिया जो अब तक उपर वाले ने बनाया था सुन्दर सब मिटा लिया
अब हम दूर जाते है सुन्दरता को निहारने प्रकृति प्रेमी कहते नही पडे तुम्हारे कदम नही तो वहाॅ जो बचा है उसे भी लगोगे बिगाड ने
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