उड रही हू तितली जैसे फैलाए पंख ठंडी ठंडी हवा जगारही मन मे उमंग
नाच रही है धरती सारी चहूॅ ओर बिखरे अनोखे रंग
उड रही हू तितली जैसे फैलाए पंख ठंडी ठंडी हवा जगारही मन मे उमंग
घिर आए कारे बदरवा नन्ही नन्ही पानी की बूॅदो के संग
उड रही हू तितली जैसे फैलाए पंख ठंडी ठंडी हवा जगा रही मन मे उमंग
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