पानी अपनी राह बना लेता है चलने वाला मंजिल पा लेता है
चीटी चलकर पहुच जाती हजार कोस बैठा ताकतवर करता रहता न चल पाने का अफसोस
बस चल पडो तो मंजिल हो जाती रास्ते का पत्थर पहुॅच जाते वहाॅ जहाॅ न पहुॅचे नजर
यही बहता पानी सिखा देता बहो तो राह मिल जाएगी वरना मंजिल दूर और दूर नजर आएगी
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