चलो की चलते है उस पार ,क्या जो तुम्हारी टूटी हुई है पतवार
प्रयास करेगे तो मिलेगा किनारा ,नही तो करने वाले पार नही कर पाते सूखी धारा
माना उम्मीद की डोर बारिक पर नही कमजोर, इस लिये पकडो ताकत से कि न छूटे छोर
पहाड चढने के लिये निगाह रखनी होती है अगले कदम, नही देखते मंजिल को हर दम
सफलता और असफलता के बीच उम्मीद ही समाधान निराशा करती पूरा नुकसान
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