तीन औरते खडी होके साथ दूर खडी सखियो से करती बात
कैसा है दिन देखो कोहरा है छाया ,बहुत दिन बीते तुमने चाय पर नही बुलाया
सडक पर दिख रही कैसी कतार ,इकठ्ठा होकर कर रहे किसी बात का इजहार
यह सब रोज की बात ,आते ही रहते है बाहर से लोग करने बात ,यहाॅ के भी दो चार हो जाते साथ
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