लौट रहा घर थक हार करते होगे सब इंतजार
पता नही बच्चे जागते मिलेग सब या सो गये होगे इंतजार कर अब
जिम्मेदारियो का भार खत्म होने को आता नही व्यापार
बच्चे और परिवारको पडती हर घडी भारी देखती पत्नि हर आती जाती गाडी
माॅ पिता का नही लगता पूजा मे ध्यान सुनती हर आवाज होकर सावधान
लौटता हूॅ तो आती है परिवार की साॅसो मे साॅस मुझको भी रहता है इसबात का एहसास
यही सब सोच कर लगता है बुरा पर जीवन है नही आसान संघर्षो से है भरा
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