बगदादी तलाश मे बिछ गई हजारो लाश, कुछ नही रहा शेष सब बन गया इतिहास
पहले बगदादी ने ढाया कहर ,बन गया जुल्म और बलात्कार की शिकार औरतो का नगर
धर्म के नाम होते इस ताह के पाप, बगदादी बन गया जिंदा अभिशाप
पता नही कैसे लोग हो जाते इनका साथ देने को तैयार ,इनके अंदर नही मनुष्यता का विचार
कहते है इन्हे हूरो की तलाश है, पता नही इन बलात्कारियो का ये कैसा विश्वास है
आज पूरा नगर तबाह मर गये हजार, जिंदा की हालत उनसे भी बेकार
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